ओ३म् गुरु चीन्हों गुरु चिन्ह पुरोहित, गुरु मुख धर्म बखांणी। जो गुरु होयवा सहजै शीले शब्दे नादे वेदे, तिहिं गुरु का आलिंकार पिछाणी। छव दरशण जिहिं के रुपण थापण, संसार बरतण निज कर थरप्या, सो गुरु प्रत्यक्ष जाणी। जिहिं के खरतर गोठ निरोतर वाचा, रहिया रुद्र समाणी। गुरु आप संतोषी अवरां पोषी, तत्त्व महारस बाणी। के के अलिया बासण होत हुताषण तामै क्षीर दुहीजूं। रसुवन गोरस घीय न लीयूं, तहां दूध न पाणी। गुरु ध्याइयेरे ज्ञानी। तोड्त मोहा अति खुरसांणी, छीजत लोहा पाणी। छल तेरी खाल पखाला, सतगुरु तोडे मन का साला। सतगुरु है तो सहज पिछाणी, कृष्ण चरित्र विन काचे करवे रह्यो न रहसी पाणी ॥1॥
Shabadwani
बिश्नोई समाज: जागरण व हवन का विधि-विधान
बिश्नोई समाज में जागरण व हवन- Bishnoi, awakening and havan in the society: बिश्नोई, समाज में जागरण व हवन मुख्य धार्मिक उत्सव (कृत्य) है श्री जम्भेश्वर भगवान् के समय हो जागरण व हवन का कार्य श्री बाजाजी तरड़ के यहां जागरण हुआ था अथवा प्रारम्भ हो चुका था। सबसे पहले ऐसा परम्परा से सुनते हैं। … Read more
शब्दवाणी विषयक विशेष बातें
श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान की शब्दवाणी: बिश्नोई धर्म का प्राण श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान की शब्दवाणी, वैदिक मन्त्रों के समान पुण्यकारक और प्रमाणभूत है। बिश्नोई धर्म के 29 नियमों को यदि शरीर माना जाए, तो शब्दवाणी उसका प्राण है। जिस प्रकार शरीर और प्राण दोनों की रक्षा आवश्यक है, उसी प्रकार बिश्नोई धर्म को पूर्ण … Read more
श्री गुरु जम्भेश्वर शब्दवाणी : शब्द 120
विष्णु-विष्णु तू भणरे प्राणीं । इस जीवन के हावै।। क्षण-क्षण आवै घटंती जावै । मरण दिनों दिन आवै ।। पालटीयो गढ़ कांय न चेत्यो । घाती रोल भनावै ।। गुरु मुख मुरखा चढे न पोहण मनमुख भार उठावै । ज्यूं ज्यूं लाज दुनी की लाजै । यूं त्यूं दाब्यो दावै ।। भलियो होयसो भली बुध … Read more
श्री गुरु जम्भेश्वर शब्दवाणी : शब्द 119
ओ३म् विष्णु-विष्णु तू भण रे प्राणी । पैंकै लाख उपाजूं ।। रतन काया बैकुंठे बासो । तेरा जरामरण भय भाजूं ।।११९।।
श्री गुरु जम्भेश्वर शब्दवाणी : शब्द 118
ओ३म् सुरगा हूंते शिंभू आयो । कहौ कूणां के काजै ।। नर निरहारी एकलवाई । परगट जोत बिराजै ।। प्रहलादा सूं वाचा कीवी । आयो बारां काजै ।। बारां मैं सू एक घटै तो । सू चेलो गुरु लाजै ।।११८।।
श्री गुरु जम्भेश्वर शब्दवाणी : शब्द 108
ओ३म् हालीलो भल पालीलो सिध पालीलो । खेड़त सूना राणो ।। चन्द सूर दोय बैल रचीलो । गंग जमन दोय रासी ।। सत संतोष दोय बीज बीजीलो । खेती खड़ी अकासी ।। चेतन रावल पहरै बैठे । मृगा खेती चर नहीं जाई ।। गुरु प्रसादे केवल ज्ञाने । ब्रह्मज्ञाने सहज स्नाने । यह घर ऋध … Read more
श्री गुरु जम्भेश्वर शब्दवाणी : शब्द 104
एक बिजनोर से बिश्नोई श्री जम्भेश्वर जी के पास आया , और बोला की हे देव ! आपके 27 नियमों का पालन तो मैं आसानी से करता हूँ . परन्तु शील व् स्नान के लिए मैं आपको यह सोना देकर छुटी चाहता हूँ . तब जम्भेश्वर ने यह शब्द सुनाया – कंचन दानु कुछ न … Read more
श्री गुरु जम्भेश्वर शब्दवाणी : शब्द 103
एक मूला नाम का ब्राहामन जम्भेश्वर के पास आया करता था । एक दिन जब वह अपने घर गया तो अपनी स्त्री से भांजे को झगड़ते देखा तो बड़ा दुखी हुआ , और जम्भेश्वर जी से यह घटना जाकर कही । तब जम्भेश्वर जी ने यह शब्द सुनाया — देखा अदेख्या सुण्या असुन्या । क्षिमा … Read more
श्री गुरु जम्भेश्वर शब्दवाणी शब्द 67 : शुक्ल हंस
शुक्ल स्वच्छ अति शुध्द हंस, पापों का नाश करने वाले श्री विष्णु गुरु जम्भेश्वरजी द्वारा उच्चरित शब्द: श्री गढ़ आल मोत पुर पाटण भुन्य नागोरी । म्हे ऊंडे नीरें अवतार लीयो । अठगी ठंगण । अदगी दागण । अगजा गंजण । ऊंनथ नाथण । अनू नवावन । काहिं को मै खैकाल कीयों । काहीं सुरग … Read more