श्री गुरु जम्भेश्वर साखी | Shri Guru Jambheshwar Sakhi

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान साखी (Jambheshwar Bhajan Sakhi) एक प्रकार का भजन है, जिसमें बिश्नोई समाज के संस्थापक गुरु जम्भेश्वर के जीवन और उपदेशों का वर्णन किया गया है। साखी में गुरु जम्भेश्वर को तारणहार, जंभू दीप, बाबो जंभोजी आदि नामों से संबोधित किया गया है। साखी में गुरु जम्भेश्वर के द्वारा दिए गए 29 नियमों का पालन करने वाले बिश्नोई समाज के लोगों के जीवन के उदाहरण भी दिए गए हैं।

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जम्भेश्वर साखी (1) : आवो मिलो जुमलै जुलो लिरिक्स

आवो मिलो जुमलै जुलो, सिंवरों सिरजणहार।

सतगुरु सतपंथ चालिया, खरतर खाण्डे धार।।

जम्भेश्वर जिभिया जपो, भीतर छोड़ विकार।

सम्पति सिरजणहार की, विधि सूं सुणो विचार।।

अवसर ढील न कीजिए, भले न लाभे वार।

जमराजा वासे बह तलबी कियो तैयार।।

चहरी वस्तु न चाखियो उर पर तज अहंकार।

बाड़े हूंता बीछडय़ा जांरी सतगुरु करसी सार।

सेरी सिंवरण प्राणियां अन्तर बड़ो आधार।।

पर निंदा पापां सिरे भूल उठावै भार।।

परलै होसी पाप सूं मुरख सहसी मार।

पाछे ही पछतावसी पापां तणी पहार।।

ओगण गारो आदमी इला रहे उरभार।

कह केसो करणी करो पावो मोक्ष द्वार।।

 

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