आरती : कूँ कूँ केरा चरण पधारो गुरु जम्भ देव लिरिक्स

गुरु जम्भेश्वर आरती: कूँ कूँ केरा चरण पधारो गुरु जंभ देव लिरिक्स

जम्भेश्वर आरती - कूँ कूँ केरा चरण पधारो
Jambheshwar aarati : koon koon kera charan padhaaro guru jambh dev lyrics

कूँ कूँ केरा चरण पधारो गुरु जम्भ देव,साधु जो भक्त थारी आरती करे।

महात्मा पुरुष थारी ध्यान धरे, जम्भगुरु ध्यावे सो सर्व सिद्धि पावे, संतों करोड़ जन्म किया, पाप झरे।।

हृदय जो हवेली माँहि रहो प्रभु रात दिन मोतियन की प्रभु माला जो गले।

कर में कमण्डल शीश पर टोपी, नायना मानों, दोय मशाल सी जरे।।

 कूँ कूँ केरा चरण …… 

सोनेरो सिंहासन प्रभु रेशम केरी गदियां, फूलां हांदी सेज प्रभु वैस्यां ही सरे।

प्रेम रा प्याला थाने पावे थारा साधु जन, मुकुट छत्र सिर  चंवर डुले।।

कूँ कूँ केरा चरण ……

शंख जो शहनाई बाजे झींझा करे झननन, भेरी जो नगाड़ा बाजे नोपता घूरे।

कंचन केरो थाल कपूर केरी बतियाँ, अगर केरो धूप रवि इंद्र जयूँ जरे।।

कूँ कूँ केरा चरण …… 

मजीरा टँकोरा झालर ,घंटा करे घन्नन्न ,शब्द सुणा सो सारा पातक जरै।

शेष् से सेवक थारे, शिव से भंडारी ब्रह्मा से खजांची सो जगत घरे।।

कूँ कूँ केरा चरण …… 

आरती में आवे आय शीश नवाये ,निश जागरण सुणे जमराज जो डरे।

साहबराम सुनावे,गावे नव निधि पावे, सीधो मुक्त सिधावे काल कर्म जो टरे।।

 कूँ कूँ केरा चरण ……

कूँ कूँ केरा चरण पधारो गुरु जम्भ देव, साधु जो भक्त थारी आरती करे।

महात्मा पुरुष थारी ध्यान धरे,

जम्भगुरु ध्यावे सो सर्व सिद्धि पावे, संतों करोड़ जन्म किया, पाप झरे।।

हृदय जो हवेली माँहि रहो प्रभु रात दिन मोतियन की प्रभु माला जो गले।

कर में कमण्डल शीश पर टोपी, नायना मानों, दोय मशाल सी जरे।।

कूँ कूँ केरा चरण…… 

सोनेरो सिंहासन प्रभु रेशम केरी गदियां, फूलां हांदी सेज प्रभु वैस्यां ही सरे।

प्रेम रा प्याला थाने पावे थारा साधु जन ,मुकुट छत्र सिर  चंवर डुले।।

कूँ कूँ केरा चरण ……

शंख जो शहनाई बाजे झींझा करे झननन, भेरी जो नगाड़ा बाजे नोपता घूरे।

कंचन केरो थाल कपूर केरी बतियाँ, अगर केरो धूप रवि इंद्र जयूँ जरे।।

कूँ कूँ केरा चरण…… 

मजीरा टँकोरा झालर, घंटा करे घन्नन्न, शब्द सुणा सो सारा पातक जरै,

शेष् से सेवक थारे, शिव से भंडारी ब्रह्मा से खजांची सो जगत घरे।।

कूँ कूँ केरा चरण…… 

आरती में आवे आय शीश नवाये, निश जागरण सुणे जमराज जो डरे।

साहबराम सुनावे, गावे नव निधि पावे, सीधो मुक्त सिधावे काल कर्म जो टरे।।

कूँ कूँ केरा चरण ……

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गुरु जम्भेश्वर आरती लिखित | Guru Jambheshwar Aarti Lyrics

जम्भेश्वर आरती Jambheshwar Aarti / Jambheshwar Bhagwan ki Aarti  Lyrics:

गुरु जम्भेश्वर जी की रती (Guru Jambheshwar Aarti) के द्वारा हम गुरु जम्भेश्वर (Guru Jambheshawar) के प्रति अपना सम्मान और श्रद्धा व्यक्त करते हैं। आरती करने से मन शांत होता है और एकाग्रता बढ़ती है। आरती से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान आरती (Jambheshwar Bhagwan ki Aarti) का पाठ करके आप गुरु जम्भेश्वर जी का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

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जम्भेश्वर आरती (1): आरती जय जम्भेश्वर की परम सतगुरू परमेश्वर की लिरिक्स

आरती जय जम्भेश्वर की परम सतगुरू परमेश्वर की । टेर।

गुरूजी जब पीपासर आये, सकल संतों के मन भाये

देवता सिद्ध मुनि दिग्पाल, गगन में खूब बजावे ताल

हुआ उच्छाह, लोहट नर नाह, मगन मन माह

देव छवि निज सुत सुंदर की । आरती जय…… ।1।

परम सुख हंसा मन मांहि, प्रभु को गोदी बैठाई

नगर की मिली सब नारी, गीत गावे दे दे तारी

अलापे राग, बड़े हैं भाग, पुण्य गये जाग

धन्य है लीला नटवर की। आरती जय…… ।2।

चराने गौवों को जावे, चरित्र ग्वालों को दिखलावे

करे सैनी से सब काजा, कहावे सिद्ध श्री जम्भ राजा

रहे योगीश, भक्त के ईश, गुरु जगदीश

पार नहीं महिमा प्रभुवर की। आरती जय…… ।3।

गुरुजी फि र समराथल आये, पन्थ श्री बिश्रोई चलवाये

होम जत तप क्रिया सारे, देख सुर नर मुनि सब हारे

किया प्रचार, वेद का सार, जगत आधार

सम्मति जिसमें विधि हर की । आरती जय…… ।4।

गुरुजी अब सेवक की सुणियों, नहीं अवगुण चित्त में धरियो

शरण निज चरणों की रखियो, पार नैया भव से करियो

यही है आस, राखियो पास, कीजियो दास

कहूं नित जय जय गुरुवर की । आरती जय…… ।5।

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